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राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कारों से कलाकारों को सम्मानित किया और कहा कि नृत्य, नाट्य विधा अभिव्यक्ति का एक शक्तिशाली माध्यम है-राज्यपाल (उ. प्र.)
February 13, 2020 • Sun India Tv News चैनल • प्रादेशिक

लखनऊः 13 फरवरी, 2020
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज संत गाडगेजी महाराज प्रेक्षागृह में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नृत्य और नाट्य अभिव्यक्ति का एक शक्तिशाली माध्यम है। इसलिये कन्या भ्रूण हत्या, दहेज, मादक पदार्थों के सेवन आदि अनेक सामाजिक बुराइयों को दूर करने तथा समाज में स्वस्थ संदेश फैलाने में नाट्य कला का प्रभावी प्रयोग किया जा सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्राचीनकाल से ही संगीत, साहित्य और नाट्य विधाओं का गौरवशाली स्थान रहा है। नाट्य कला मानव-जीवन के विभिन्न पक्षों तथा अनेक सामाजिक बुराइयों को अभिव्यक्ति के माध्यम से दूर करने में अह्म भूमिका का निर्वाह करती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश एक विशाल सांस्कृतिक क्षेत्र है, जिसकी विविध समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराओं के प्रशिक्षण एवं संवर्द्धन की दिशा में अभी बहुत कुछ किया जाना है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि संगीत नाटक अकादमी द्वारा उत्तर प्रदेश में कला के प्रति जागरूकता लाने, नवोदित प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, विलुप्त हो रही विधाओं के प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन में योगदान दिया जा रहा है। राज्यपाल ने अकादमी अभिलेखागार के अन्तर्गत संग्रहित किये गये समस्त संगीत, नृत्य एवं नाट्य कार्यक्रमों की आडियो-वीडियो हेतु अकादमी को विशेष रूप से बधाई दी।

राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के वर्ष 2009 से 2019 तक के अकादमी पुरस्कार, सफदर हाशमी पुरस्कार, बी0एम0 शाह एवं रत्न सदस्यों सम्मान से सम्मानित किया। राज्यपाल ने संगीत अकादमी के सर्वोच्च सम्मान ‘रत्न सदस्य’ से वर्ष 2009 के लिये श्री वि0व0 श्रीखण्डे, मुम्बई को, वर्ष 2010 के लिये श्री सत्यभान शर्मा, आगरा को, वर्ष 2011 के लिये श्री चितरंजन ज्योतिषी, वाराणसी को, वर्ष 2012 के लिये पं0 राजेश्वर आचार्य, वाराणसी को वर्ष 2013 के लिये श्रीमती मालिनी अवस्थी, लखनऊ को सम्मानित किया।
समारोह को उत्तर प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डाॅ0 नीलकण्ठ तिवारी ने अपने सम्बोधन में कहा कि राष्ट्र की आत्मा संस्कृति है तथा संस्कृति की आत्मा संगीत है। उन्होंने कहा कि 2009 से अब तक लम्बित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से आज विभिन्न विधाओं के कलाकारों एवं विभूतियों को राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया जाना गौरव की बात है।
  इस अवसर पर संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डाॅ0 पूर्णिमा पाण्डेय, प्रमुख सचिव संस्कृति श्री जितेन्द्र कुमार, अकादमी के उपाध्यक्ष डाॅ0 धन्नू लाल गौतम, अकादमी के सचिव श्री तरूण राज सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। इस अवसर पर कथक कला केन्द्र के कलाकारों ने राज्यपाल के समक्ष ‘गंगावतरण’ नृत्य नाटिका प्रस्तुत की।

राजभवन में कृषि विभाग एवं कृृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के साथ बैठक सम्पन्न
------‘एक जनपद एक उत्पाद’ की तर्ज पर ‘एक जनपद एक विशेष फसल’ प्रोजेक्ट तैयार किया जाय- राज्यपाल
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मोटे अनाज मानव स्वास्थ्य के लिये लाभदायक- आनंदीबेन पटेल
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 लखनऊः 13 फरवरी2020
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज राजभवन में आयोजित कृषि विभाग उत्तर प्रदेश एवं कृृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपतिगण के साथ आयोजित बैठक में कहा कि ‘एक जनपद एक उत्पाद’ की तरह ही ‘एक जनपद एक विशेष फसल’ प्रोजेक्ट तैयार किया जाये, जिससे जनपद में होने वाली फसल विशेष को प्राथमिकता मिल सके। इसके साथ ही कृषि विश्वविद्यालय अपने उन विद्यार्थियों को खेती से सीधे जोड़े, जिनके पास खेती योग्य भूमि उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थी स्वयं का व्यवसाय कर सकेंगे और दूसरों को भी नौकरी दे सकेंगे।  
राज्यपाल ने कहा कि स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की दृष्टि से आज जैविक खेती को बढ़ावा दिये जाने की आवश्यकता है। अत्यधिक कृषि रासायनों एवं उर्वरकों के उपयोग से खाद्यान्न पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में किसानों को जागरूक किया जाये और उन्हें जैविक खेती को बढ़ावा देने को प्रेरित किया जाये। जैविक खेती द्वारा मृदा की प्राकृतिक उर्वरता भी बनी रहती है और पर्यावरण का क्षरण भी न्यूनतम होता है। राज्यपाल ने कहा कि किसानों के लिए आॅन-लाइन फसल उत्पाद बेचने की व्यवस्था पर भी कार्य करने की आवश्यकता है। इससे किसान सीधे अपने कृषि उत्पादों को बाहर बेच सकेंगे और बिचैलिये फायदा नहीं उठा सकेंगे। किसानों की आय दोगुनी करने के लिये विशेष कार्य किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को अपने उत्पादों को बेचने के लिए बाजार उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए तभी उनकी आमदनी में अपेक्षित वृद्धि हो सकती है।श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि कृषकों को पारम्परिक खेती में नवीनतम तकनीकों का समावेश कर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ाने हेतु प्रेरित करना चाहिए, क्योंकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह सिद्ध हो चुका है कि मोटे अनाज मानव स्वास्थ्य के लिये बहुत लाभदायक हैं। राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इनकी मांग बढ़ रही है।

राज्यपाल ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय सरकार पर निर्भरता कम कर आर्थिक उन्नयन का प्रयास करें तथा पब्लिक और किसान को एक साथ जोडने में अपनी भूमिका निभायें। इसके साथ ही विश्वविद्यालय किसानों को मृदा स्वास्थ्य परीक्षण के अनुसार फसलों की बुआई करने, फसल अवशेष न जलाने तथा पर्यावरण बचाने हेतु भी प्रेरित करें।
प्रमुख सचिव कृषि श्री अमित मोहन प्रसाद ने बैठक में कहा कि प्रदेश के 18 मण्डलों में किसानों की सब्जियों तथा अन्य फसलों के जैविक उत्पादों को बेचने के लिए मण्डियों में एक स्थान उपलब्ध कराया जायेगा, जिसमें किसान अपने कृषि उत्पादों को सीधे बेच सकते हैं। इसके लिये प्रत्येक माह के पहले और तीसरे शनिवार-रविवार का दिन निश्चित किया गया है। उन्होंने बैठक में यह भी बताया कि ‘द मिलियन फार्मर्स स्कूल’ के माध्यम से किसानों को खेती के बारे में नवीनतम जानकारी कृषि विशेषज्ञों द्वारा दी जाती है।
बैठक में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव श्री हेमन्त राव, प्रमुख सचिव पशु श्री बी0एल0 मीना, पं0 दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान मथुरा के कुलपति प्रो0 जी0के0 सिंह, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति डाॅ0 आर0के0 मित्तल, नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अयोध्या के कुलपति डाॅ0 बृजेश, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा के कुलपति डाॅ0 यू0एस0 गौतम, चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति डाॅ0 डी0आर0 सिंह, राज्यपाल के विशेष सचिव श्री अशोक चन्द्र तथा राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी श्री केयूर सम्पत उपस्थित थे।