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अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला दोनों पक्षों का रखा ख्याल विवादित जमीन रामलला को दे दी,5 एकड़ जमीन मस्जिद के लिए भी दी::--
November 9, 2019 • Sun India Tv News चैनल

अयोध्या पर फैसला :-16 अक्टूबर से सुरक्षित था  ।
आज सुबह 10:30 बजे उच्चतम न्यायालय के कोर्ट न0 1 में 5 जजों की बेंच की मौजूदगी में एक राय के साथ CJI रंजन गोगोई का ऐतिहासिक फैसला :-1857 से पहले हिंदू पूजा करते थे विवादित जमीन का बटवारा नहीं होगा। विवादित जमीन पर ही बनेगा राम मंदिर  । मुस्लिम समाज को 5 एकड़ जमीन मस्जिद बनाने के लिए अलग दी जायेगी ।

: विवादित भूमि नजूल की ,,,,कोर्ट के लिए ये सही नहीं है कि वो धर्मशास्त्र पर विचार करे- संविधान का आधार धर्मनिरपेक्षता है- निर्मोही अखाड़ा का दावा खारिज: बाबरी मस्जिद खाली जगह पर नहीं बनाई गई थी-

: *सीजेआई- ने कहा राम चबूतरा, भंडारगृह, सीता रसोई से ये साबित होता है कि यहां हिन्दू परिक्रमा करते रहते थे..: निर्मोही अखाड़े की याचिका ख़ारिज . अब रामलला विराजमान और सुन्नी बोर्ड की याचिका पर सुनवाई जारी

 रिपोर्ट मे १२ वीं सदी के मंदिर होने का ज़िक्र-: 1949 में 2 मूर्तियां रखी गयीं आस्था और विश्वास पर मालिकाना हक नहीं बनता - ASI रिपोर्ट में मंदिर की बात कही गयी है, खाली जमीन पर मस्जिद नहीं बनाई गई थी। खुदाई  में जो मिला वह इस्लामिक ढांचा नहीं था।
 सीजेआई- निर्मोही अखाड़ा सेवादार नही है, इनकी समय सीमा के बाद याचिका दाखिल हुई है जो 6 साल की थी, इसलिए इसे नही मान सकते,इसे हम नही मान सकते.. .
सीजेआई- सूट नम्बर5- रामलला को कानूनी मान्यता देते हैं...
ASI की खुदाई के सबूतों को अनदेखा नही कर सकते, हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुरातत्व विभाग ने वहां खुदाई की थी...इसे अनदेखा नही कर सकते...सूट नम्बर4- सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने सुनवाई के दौरान कई बार बयान बदले हैं..सीजेआई-ने कहा एएसआई रिपोर्ट के अनुसार- बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नही बनी थी, जमीन में पुराने संरचनाये बनी मिली...
: भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था इसमें कोई विवाद नहीं- हिंदू आस्था गलत होने का कोई प्रमाण नहीं पाया गया है - अंग्रेज़ो के आने से पहले पूजा होती थी 18वी सदी तक नमाज़ का कोई रिकार्ड नहीं

राममंदिर के लिए ट्रस्ट बनाएगी सरकार केंद्र सरकार 3 महीने में स्कीम बनाए-1856-57 के पहले भीतरी क्षेत्र में जाने पर हिन्दुओ को नहीं थी रोक: विवादित जमीन रामलला को-सीजेआई- ने कहा 1856 से पहले वहां नमाज़ होती थी या नही, या फिर अंदरूनी हिस्से में हिन्दू वहां पूजा करते थे..इसका सबूत नही है... हिंदुओं को रोके जाने पर फिर उंन्होने बाहर अंग्रेज़ो द्वारा लगवाई गयी रेलिंग के बाहर चबूतरे पर ही पूजा करना शुरू कर दिया .. फिर भी हिन्दू पक्ष मुख्य गुम्बद के नीचे गर्भ गृह मानते हैं..

मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए दूसरी जगह मिलेगी -: 5 एकड़ जमीन मस्जिद के लिए मुसलमानों को दी जाएगी।