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17 फरवरी से चलेगा विशेष फाइलेरिया उन्मूलन अभियान:::---
January 11, 2020 • Sun India Tv News चैनल • प्रादेशिक

17 फरवरी से चलेगा विशेष फाइलेरिया उन्मूलन अभियान,31जनपदों में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान,9 करोड़ 98 लाख की जनसंख्या को कवर करने का लक्ष्य,80,000 टीमें लगायी जायेंगी ।
लखनऊ, 11  जनवरी  2020 । 
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में शनिवार को आयोजित प्रेसवार्ता में अपर निदेशक, मलेरिया एवं वेक्टर बोर्न डिजीज डाक्टर  वी पी सिंह, ने कहा  राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत लखनऊ,  गोरखपुर, वाराणसी  सहित 31 जनपदों में 17 फरवरी से 29 फरवरी तक फाइलेरिया की रोकथाम के  लिये अभियान चलाया जाएगा,  जिसमें 30 जनपदों में डबल ड्रग और वाराणसी में पिछले चक्र की भांति ट्रिपल ड्रग या आई डी ए संचालित किया जाएगा l 

कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं जिन्हें फरवरी के प्रथम सप्ताह में जनपदों को भेजा जाएगा जिससे कि समय रहते वह ब्लॉक और क्षेत्र तक पहुंचाई जा सकें l
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में माइक्रोफाइलेरिया स्वस्थ लोगों में 9 से लेकर 26% तक पाया गया है जो 8 से 10 साल बाद हाथीपांव  एवं हाइड्रोसील के रूप में प्रकट होता है l
इस रोग का संक्रमण अधिकांशत: स्कूल जाने वाली उम्र के बच्चों में हो जाता है जिससे उनके लसिका तंत्र (लिंफेटिक सिस्टम) को स्थाई क्षति पहुंचती है परिणामस्वरूप बच्चों में कार्य करने की क्षमता एवं भागदौड़ की क्षमता घट जाती है और भविष्य में उनको रोजगार पाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है l

हम अपने बच्चों और परिवार को साल में फाइलेरिया से बचाव की एक खुराक खिलाकर  इस स्थाई क्षति से  बचा सकते हैं । हाथी पांव का कोई समुचित इलाज नहीं है, बचाव ही इसका इलाज है।
 फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के द्वितीय चरण में इस वर्ष 9 करोड़ 98 लाख लोगों को इस दवा सेवन कराने का लक्ष्य रखा गया हैl 80,000 टीमों के माध्यम से लोगों को दवा खिलायी जायेगी । मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा नरेंद्र अग्रवाल ने बताया लखनऊ में 71 इकाइयों के माध्यम से दवा खिलायी जायेगी । अभी माइक्रोप्लानिंग का काम चल रहा  है । हर जिले मे 8 जगह स्लाइड बनायी जायेगी और प्रत्येक जगह लगभग 500 स्लाइड बनेंगी ।                                 एम डी ए राऊंड को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए  स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं अन्य सहयोगियों का प्रशिक्षण कर उन्हें घर-घर अपने समक्ष दवा खिलाने के लिए निर्देशित किया गया हैl किसी भी स्थिति में घरों पर दवा का वितरण नहीं किया जाएगा l कार्य के पर्यवेक्षण हेतु प्रत्येक पांच दलों पर एक सुपरवाइजर नियुक्त किया गया है जिनकी सायंकालीन समीक्षा बैठक होगी एवं प्रतिदिन कार्य की उपलब्धि की समीक्षा की जाएगी l

जिलों  में संक्रमण की स्थिति जांचने के लिए 248 लैब टेक्नीशियन को राज्य स्तर पर प्रशिक्षित किया जा चुका हैं   इसके अलावा आशा  कार्यकर्ता द्वारा घर-घर सर्वेक्षण किया जा रहा है  | साथ ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है । इस अभियान का रात्रि ब्लड  सर्वेक्षण आज से शुरु हो रहा है ।
यह अभियान स्वास्थ्य , पंचायती राज , शिक्षा, समाज कल्याण (आईसीडीएस) नगर विकास एवं सूचना विभाग के पारस्परिक सहयोग  से चलाया जाएगा | सप्ताह में रविवार और बुधवार को छोड़कर बाकी दिन यह अभियान चलाया जायेगा । इन दिनों में मॉप अप राउंड चलाया जायेगा । एमडीए जिलों में डाईइथाइलकार्बमजीन (डी.ई.सी.) एवं अल्बेन्डाज़ोल  की दवा तथा आईडीए जिले यानि वाराणसी में डी.ई.सी. तथा अल्बेंडाजोल के साथ  आइवर्मेक्टिन की दवा दी जायेगी ।
इस अभियान में 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं व गंभीर रोग से ग्रसित  व्यक्तियों को दवा का सेवन नहीं कराना है |  जिन  व्यक्तियों में फाइलेरिया के कीटाणु रहते हैं उन्हें दवा के सेवन के बाद चक्कर आना, जी मिचलाना, उल्टी आना, हल्का बुखार आना आदि समस्याएँ हो सकती हैं लेकिन इससे घबराना नहीं चाहिए | इस अभियान में दवा एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से घर-घर जाकर खिलाई जाएगी, वह अपने सामने दवा  खिलायेंगी, जो भी व्यक्ति दवा खाने से वंचित रह जाता है वह अपने पास के सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं व आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के घर से  दवा प्राप्त कर सकता है | हर व्यक्ति को साल में एक बार इस दवा का सेवन अवश्य करना चाहिए | अगर 5 वर्ष तक इस दवा का सेवन कर लिया जाता है तो जीवन भर फाइलेरिया रोग से बच सकते हैं | यदि किसी व्यक्ति को यह रोग हो जाता है तो वह जीवन भर इस रोग से ग्रसित रहता है | 
 अल्बेंडाजोल चबा कर खानी है । खाली पेट दवा नहीं खिलानी है ।लोगों को दवा खिलाने के बाद बाएं हाथ की तर्जनी उंगली के नाखून पर मार्क किया जायेगा और यदि किसी प्रकार की समस्या है तो दाहिने हाथ के इंडेक्स फिंगर पर मार्क किया जायेगा ।
फाइलेरिया क्या है ?
फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है जिसे समान्यतः हाथी पाँव के नाम से जाना जाता है |
फाइलेरिया के लक्षण  -पेशाब में सफेद रंग के द्रव का जाना जिसे कईलुरीया भी कहते हैं फाइलेरिया का ही एक लक्षण हैं 
-पैरों व हाथों में सूजन (हाथी पांव ), पुरुषों में हाइड्रोसील(अंडकोश में सूजन) और महिलाओं में ब्रेस्ट में सूजन ।