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सन इण्डिया टीवी न्यूज चैनल की मुहिम रंग लाई उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के चालको को मिला आराम कक्ष:-
September 19, 2019 • Sun India Tv News चैनल

 "सुरक्षित और आरामदायक" यात्रा सुनिश्चित करने की चालक सबसे महत्वपूर्ण कुंजी हैं। यूपीएसआरटीसी दुर्घटनाओं से बचने / कम करने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चालकों के शारीरिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के हर संभव उपाय कर रहा है।

यूपी भर के सभी डिपो में माह जुलाई और अगस्त में बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए गए। स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट के आधार पर, ड्राइवरों की तैनाती, उनके उपचार और सुधारात्मक उपाय किए गए।

  सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए ड्राइवरों की "अच्छी नींद" और "बेहतर आराम सुविधाएं" काफी महत्वपूर्ण हैं।

इसके महत्व और तात्कालिक आवश्यकता को देखते हुए, यूपीएसआरटीसी मुख्यालय ने प्रत्येक डिपो में सभी रात्रि कालीन रूट के सभी चालकों के लिए "आरामगाह " स्थापित कर रहा है।

- अब तक लगभग 80 प्रतिशत डिपो (113 में से 92) में आराम कक्ष हैं और बाकी 21 डिपो में, निर्माण कार्य चल रहा है और अक्टूबर तक प्राथमिकता के आधार पर यथाशीघ्र पूरा हो जाएगा।

 यूपीएसआरटीसी के प्रबंध निदेशक ने कल कैसरबाग डिपो के ड्राइवरों के लिए ऐसे ही एक "नए आराम कक्ष रूम" का उद्घाटन किया।
  पिछले महीने एमडी के कैसरबाग बस डिपो की यात्रा के दौरान चालकों से बातचीत के दौरान इसकी मांग की गई थी।

 इस नए रेस्ट रूम में "पर्सनल लॉकर्स" के साथ ही "बंकर बेड" भी हैं और जो रात की ड्यूटी करने वाले 40 से 50 ड्राइवरों के लिए पर्याप्त हैं। इस नई व्यवस्था से रात्रि कालीन ड्यूटी करने वाले ड्राइवर्स काफी खुश थे। यह निश्चित रूप से उनकी अच्छी ड्राइविंग की आदतों और स्वास्थ्य की स्थिति सुधारने में मदद करेगा।

इसी तरह का "नया रेस्ट रूम" अवध डिपो में भी निर्माणाधीन है, जो अगले 15 दिनों में पूरा हो जाएगा।

यूपीएसआरटीसी मुख्यालय ऐसे प्रत्येक डिपो में निर्माण/ निर्माण की स्थिति की निगरानी कर रहा है, जहां यह सुविधा नहीं है। उम्मीद है कि अक्टूबर अंत तक, सभी डिपो में एक अच्छे आराम कक्ष की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।

बताते चले सन इण्डिया टीवी न्यूज चैनल की टीम ने उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक राजशेखर को चालको की समस्या से अवगत कराया था तथा कुछ फ़ोटो ग्राफ भी दिखाई थी जिसमे चालक 1000 किलोमीटर गाड़ी चलाकर चिल चिलाती धूप में बस के नीचे सोने को मजबूर थे जिसका संज्ञान प्रबन्ध निदेशक महोदय ने लिया और तत्काल पूरे प्रदेश में "आरामगाह" बनाने के आदेश दिए थे।