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ब्रेकिंग गोरखपुर:- उत्तर प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा मंत्री भी हुए भ्र्ष्टाचार का शिकार *एक BSA ने मुझसे भी मांगी थी घूस-:बेसिक शिक्षा मंत्री*
September 2, 2019 • Sun India Tv News चैनल

*ब्रेकिंग न्यूज़ गोरखपुर*

बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि का उल्लेख और 20 साल पुराना अनुभव साझा करता हुए बताया कि एक समय उनसे भी एक बीएसए ने घूस मांगी थी। यह वाकया तब का है जब सतीश द्विवेदी विद्यार्थी थे और उन्होंने बीटीसी प्रवेश परीक्षा पास कर ली थी। उन दिनों बीटीसी में प्रवेश को नौकरी की गारंटी माना जाता था। उन्होंने परीक्षा पास करने के बाद इंटरव्यू में तत्कालीन बीएसए रमेश कुमार द्वारा 20 हजार रुपये मांगे जाने की कहानी सुनाई।

गोरखपुर के वैष्णवी लॉन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अभिनंदन समारोह में उन्होंने कहा कि बीएसए ने कह रखा था कि जितने हजार रुपये दोगे उतने ही नम्बर मिलेंगे। अपने ज्वेलर मामा की दुकान पर काम करने वाले मित्र ने  दुकान से अपनी गारंटी पर रुपये उधार लेकर व्यवस्था की। आर्थिक तंगी के चलते नौकरी के लिए परिवार का दबाव इतना था कि वह इस भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ कर न सके। 
परिवार में घोर गरीबी थी। पिताजी ने किसी शिक्षक के माध्यम से रुपए भिजवाए इसका पता मुझे बाद में चला, लेकिन परिवार का दबाव इतना था कि कुछ कर ना सका। उस शिक्षक ने भी पिताजी को धोखा दिया और रुपए का इस्तेमाल अपने एक साथी शिक्षक का निलंबन वापस कराने के लिए कर लिया। उन्हें नौकरी नहीं मिल पाई। इस घटना के बाद उन्होंने अपने परिवार से कहा कि अब वह किसी दबाव में नहीं आएंगे। 

*नौकरी नहीं मिली तो पिता ने शादी का दबाव बनाया*

डॉ सतीश द्विवेदी ने कहा कि पिताजी विवाह कराना चाहते थे। उन्होंने कह दिया कि जब तक अपने पैर पर खड़े नहीं होंगे, विवाह नहीं करेंगे। किसी की नहीं सुनेंगे। इसके बाद नेट, पीएचडी की। जनरल टिकट लेकर ट्रेन से इलाहाबाद गए। अभाविप कार्यकर्ता होने के नाते रहने और भोजन की व्यवस्था तब  संगठन मंत्री रहे हरीश जी ने निशुल्क कर दी। 400 रुपये का फार्म भरा और असिस्टेंट प्रोफेसर बन गए। इसके बाद की कहानी सब लोग जानते हैं। 

*आज सेवा में होते तो बीएसए रमेश कुमार बर्खास्त होने वाले पहले होते*

बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि तत्कालीन बीएसए रमेश कुमार अब सेवानिवृत हो चुके होंगे। यदि  सेवा में होते तो वह उनके द्वारा बर्खास्त किए जाने वाले पहले बीएसए होते। 
कोई चपरासी बनाने को कह देता तो पिताजी खुश हो जाते 
बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि उनके पिताजी से आसपास के किसी स्कूल-कालेज के प्रधानाचार्य उनकी (सतीश द्विवेदी) की पढ़ाई-लिखाई की तारीफ करते हुए चपरासी बनाने का ऑफर भी दे देते थे तो पिताजी उत्साहित होकर उन्हें फोन कर बुलाने लगते थे। 

*विद्यार्थी जीवन में जूते भी नहीं होते थे*

कहा कि विद्यार्थी जीवन में उनके पास पहनने को जूता भी नहीं होता था। किसी के रिजेक्ट किए हुए जूते में रुई डाल कर काम चलाते थे। घर से पढ़ने के लिए 150 रुपये मिलते थे। 100 रुपये कमरे के किराए में चले जाते थे। जेब खर्च के 50 रुपयों में से ही घर जाने के लिए बस के किराये के 11 रुपये बचाने पड़ते थे। 

*सीएम ने जिम्मेदारी दी, हर हाल में पूरा करेंगे*
गरीबी के उन दिनों को वह कभी भूल नहीं सकते। उन हालात से उठा कर संगठन ने पहले विधायक बनाया। अब मुख्यमंत्री जी ने इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी। इस जिम्मेदारी को हर हाल में सफलतापूर्वक पूरा करके दिखाऊंगा। कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में किसीं भी कारपोरेट विद्यालय से बेहतर शिक्षक हैं। 95 प्रतिशत शिक्षक बड़ी ईमानदारी और मेहनत से अपना काम कर रहे हैं। 20 वर्षों से भ्रष्ट व्यवस्था ने विभाग के सिस्टम को इतना सड़ा दिया कि मायूसी के शिकार हैं। विद्यार्थी परिषद और भाजपा संगठन में अपने पुराने साथियों का आह्वान किया कि कभी भी विभाग के बारे में कोई सुझाव देना हो, कहीं कुछ गलत दिखे या उनके बारे में भी कहीं कोई नकारात्मक चर्चा सुनाई दे तो बेधड़क उनसे कह दें।