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दिल्ली की पहली महिला पूर्व मुख्यमंत्री/पूर्व विदेश मंत्री और बीजेपी की सीनियर लीडर सुषमा स्वराज का दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन
August 7, 2019 • Sun India Tv News चैनल

पूर्व विदेश मंत्री और बीजेपी की सीनियर लीडर सुषमा स्वराज का दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे अर्से से बीमार चल रही थीं और उनका किडनी ट्रांसप्लांट भी हुआ था। बीमारी की वजह से ही उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव से खुद को अलग रखा था। वर्ष 2014 में सुषमा स्वराज को विदेश मंत्रालय का प्रभार मिला था। बीजेपी के शासन के दौरान सुषमा दिल्ली की मुख्यमंत्री भी रही थी। उन्हें दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुआ था।

सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 को हुआ था। उन्होंने अंबाला में एसडी कॉलेज अम्बाला छावनी से बीए किया और पंजाब यूनिवर्सिटी से चंडीगढ़ से लॉ की पढ़ाई की थी। सुषमा स्वराज ने 1974 के छात्र आंदोलन में भी बढ़-चढकर हिस्सा लिया था। सुषमा स्वराज के निधन की खबर सुनते ही डॉ. हर्षवर्धन, नितिन गडकरी, मनोज तिवारी एम्स पहुंच गए।

दिल्ली में श्रीमती सुषमा स्वराज जी को श्रद्धांजलि देते उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित श्रीमती  सुषमा स्वराज के असामयिक निधन का संदेश जान कर दुखी हैं l
श्री दीक्षित ने अपने शोक संदेश में कहा कि भारत एक ऐसे असाधारण नेता  को खो दिया है जिसकी भरपाई हो पाना मुश्किल है  भारत की राजनीति की  मुखर वक्ता एवं सर्वश्रेष्ठ सांसद  के साथ ही मिसाल के रूप में करोड़ों  जनमानस की प्रेरणा स्रोत रही हैं

उप  मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद ने दिल्ली मे दिवंगत  सुषमा  स्वराज  के पार्थिव शरीर पर  पुष्पअर्पित  कर  श्रद्धांजलि  दी।

कहां गयी वैदुष्य की वह जाज्वल्य 'सुषमा',,शायद किसी बड़े दायित्व का निर्वाह करने
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भैया,,मैं, सुषमा पहचाना?? जिसको बेटी कहते थे याद आया,,जिस के भाषण पर गर्वित होते रहते थे

वही,,वही,,जिसको संसद में मंत्री का सम्मान दिया
राजनीति के गुरुवर बन कर देशधर्म का ज्ञान दिया

हां,, हां भैया,,वही ,,वही,,जो हर दिन मिथक तोड़ती थी
हां,, जो स्वयं नाम के आगे  शब्द 'स्वराज' जोड़ती थी

हां ,,हां बेटी याद आ गया तू संसद की सुषमा थी
मैं अक्सर सोचा करता तू बेटी थी या फिर माँ थी

ऐसा कह कर 'अटल बिहारी' मुस्काये फिर घबराए
इतनी जल्दी भारत छोड़ा? ऐसा कह कर झल्लाये

सुषमा बोल उठी,,भैया ! जो खबर आज सीने में थी
उसके बाद नहीं अब कोई रुचि मेरी जीने में थी

उसी खबर के इंतजार में आप तड़पते रहे सदा
कब ऐसा दिन आएगा,,बस यही सोचते रहे सदा

मुझे लगा ,,मैं सबसे पहले खबर आपको दूँ आकर
अपने अटल बिहारी दादा को खुश खबरी दूँ जाकर

सुनो आज कश्मीर हिन्द का पक्का अंग बन गया है
जिसके लिए आप जूझे थे,वो सत्संग बन गया है

जिसके लिए 'मुखर्जी जी' हंस कर बलिदान हो गए थे
धरती के उस स्वर्ग की खातिर जो कुर्बान हो गए थे

आज आपके दो बेटों ने वो कर्तव्य निभाया है
स्वप्न आपका था जिसको अमली जामा पहनाया है

इतना था उत्साह हृदय में जिसका झुकना मुश्किल था
बिना आपको बात बताए मेरा रुकना मुश्किल था

 मुझको,,लगता है सुषमा जी फर्ज निभाने चली गयीं
अपने 'गुरुवर' को जल्दी खुश खबर सुनाने चली गयीं
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