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झाँसी पुलिस का फर्जी एनकाउंटर दर्ज हो हत्या का मुकद्दमा सीबीआई से हो घटना की जाँच ::-चन्द्रपाल यादव सपा नेता
October 7, 2019 • Sun India Tv News चैनल


झांसी में पुलिस मुठभेड़ की संदिग्ध घटना का भयाभय परिणाम संभावित फर्जी एंनकाउंटरको लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में ?

*घटना की पूरी असली या नकली कहानी*

सच जाने हमारे सवाददाता यशपालसिंह मोठ से पूरी रिपोर्ट

झाँसी(गुरसरांय)। बीते शुक्रवार शनिवार की मध्यरात्रि झांसी के मोठ थाना क्षेत्र में छुट्टी से लौटकर आये इंस्पेक्टर से कथित ट्रक छोड़ने के बदले दिए गए पैसे वापस लेने के दौरान हुए विवाद के दौरान मारपीट और फायरिंग के बाद गुरसरांय थानाक्षेत्र में पुलिस टीमों द्वारा युवकों को घेर कर मुठभेड़ के दौरान एक युवक की मौत के बाद मामले ने राजनैतिक चरम पाकर सरकार की फजीहत का रुख अख्तियार कर लिया है ।

एक तरफ जहां जिले की पुलिस में हड़कंप मचा हुआ है, तो वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र में पुलिस की इस कार्यशैली पर सवालिया संकेतों की धुंध से जानता में भारी आक्रोश नजर आ रहा है । जबकि इस पूरे मामले को लेकर सपा के राज्यसभा सांसद ड्रा. चंद्रपाल सिंह यादव द्वारा युवक की मौत को पुलिस द्वारा की गई हत्या बताया जा रहा है। जबकि पुलिस इसे पुलिस पार्टी पर मुठभेड़ के दौरान की गई फायरिंग के जबाब में की गई कार्यवाही के दौरान हुई घटना मान रही है।

सनसनीखेज इस घटनाक्रम के बाद झांसी पुलिस चौतरफा घिरी नजर आ रही है । पुलिस अब इस मामले को मैनेज करने में जुट गई है। जबकि आमजन में इस घटना को लेकर पुलिस की फर्जी मुड़भेड़ का नाम दिया जा रहा है। इस मामले में आज यानि रविवार को गुरसांराय थाना पुलिस ने एरच थाना प्रभारी की तहरीर पर तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लेने की बात सूत्र बता रहे हैं और इस मामले की विवेचना थानाध्यक्ष टहरौली को सौंपी जा चुकी है।

घटना की बुनियाद ?

यदि सूत्रों की माने तो 29 सितंबर को एरच थाना क्षेत्र के गांव करगुंआ निवासी पुष्पेंद्र यादव का ट्रक मोठ थाना पुलिस ने पकड़ लिया था, अक्सर होता यही है कि ऎसे मामलों में पुलिस सौदा करती है और वही हुआ भी इसी ट्रक को छोड़ने को लेकर मोठ थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह चौहान और पुष्पेंद्र के बीच ले-देकर मामला निपटाने की बात 50 हजार में तय हुई । धर्मेंद्र चौहान ने पुष्पेंद्र से 50 हजार रूपये ले भी लिए थे। लेकिन इससे पहले कि थाने से ट्रक छूटता खनिज विभाग की टीम ने मौके पर पहुँच कर ट्रक को सीज कर दिया। पुष्पेंद्र ने धर्मेंद्र सिंह चौहान से अपनी ₹50000 रकम वापस मांगी तो थानेदार ने दूसरे दिन पैसे वापस कर देने की बात कही। लेकिन दूसरे दिन थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह चौहान अपने घर कानपुर को रवाना हो गए। धर्मेंद्र की वापसी बीते शनिवार की सांय हुई, पुष्पेंद्र ने धर्मेंद्र को पैसे वापस करने के लिए फोन किया जिसको लेकर इंस्पेक्टर धर्मेंद्र ने पुष्पेंद्र को बम्होरी स्थित ढावे पर मिलने के लिए कहा सूत्रों बताते हैं कि धावे पर पहुंचकर पुष्पेंद्र ने इस्पेक्टर धर्मेंद्र से ट्रक छोड़ने के लिए दिए गए ₹50000 वापस मांगे जिसको लेकर इंस्पेक्टर धर्मेंद्र ने पुष्पेंद्र को पुलसिया भाषा में हड़काया और रकम आगे एडजस्ट करने को कहा लेकिन बात नहीं बनी , दोनों में विवाद शुरू हुआ और मामले ने इतना तूल पकड़ा कि बात गाली-गलौज से हाथापाई पर आ गई, बौखलाए पुष्पेंद्र ने पास पड़े एक पत्थर को इंस्पेक्टर के सर में दे मारा जिससे इंस्पेक्टर लहू लुहान हो गए , थानेदार के सर से खून देख पुष्पेंद्र अपने साथी के साथ मोटरसाइकिल से भाग निकला ।
 झल्लाए इंस्पेक्टर ने इस घटना की जानकारी थाने में कर दी अभी पुष्पेंद्र अपने साथी के साथ भुजोंद के पास ही पहुंचा था, तभी धर्मेंद्र चौहान समेत अन्य पुलिस बल ने बाइक से भाग रहे पुष्पेंद्र और उसके साथी को खदेड़ना शुरू कर दिया। इसी दौरान सिर में पत्थर लगने से बौखलाए धर्मेंद्र चौहान ने आवेश में आकर बाइक से भाग रहे पुष्पेंद्र और उसके साथी पर फायर झोंक दिया। जिससे गोली बाइक के पीछे बैठे पुष्पेंद्र को जा लगी, और वह नीचे गिर गया। जबकि बाइक चला रहा युवक जान बचाकर किसी तरह भाग निकला।

*पुलिस की कहानी पर पानी ?*

इस पूरे घटनाक्रम में सूत्र जहां कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ पुलिस की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक शनिवार की देर शाम मोठ थाना क्षेत्र के बम्होरी तिराहे पर छुट्टी से लौट कर आए इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह चौहान को कुछ बदमाशों ने रोककर उनसे मोबाइल व क्रेटा कार छीन ली और उन पर फायरिंग करते हुए भाग गए। जिससे वह घायल हो गए। और उन्हें रात में ही मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। इस घटना की सूचना के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर शनिवार की मध्यरात्रि ही स्वाट टीम, सर्विलेंस टीम समेत आसपास के थानों की पुलिस को बदमाशों को पकड़ने के लिए कंट्रोल रूम से निर्देशित किया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इसी दौरान पुलिस को जानकारी हुई कि मौठ इंस्पेक्टर पर हमला करने वाले बदमाश एरच पुल की तरफ आ रहे हैं। जिसको लेकर स्वाट टीम प्रभारी, सर्विलांस प्रभारी, एरच थानाध्यक्ष और गुरसराय थानाध्यक्ष को इसकी जानकारी दी गई और एरच थानाध्यक्ष के निर्देशन में बदमाशों को पकड़ने के निर्देश दिए गए। 

पुलिस का कहना है कि इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि उक्त बदमाश गुरसराय-एरच रोड पर आलमपुरा संपर्क मार्ग की तरफ आ रहे हैं. सूचना के आधार पर पुलिस टीमों ने घेरना शुरू कर दिया। इसके बाद कार से आए लोगों ने पुलिस बल पर फायरिंग करनी शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भी करीब आधा दर्जन राउंड जवाबी फायरिंग की। इस दौरान कार की ड्राइविंग सीट पर बैठे एक युवक को गोली लगी। जबकि दो अन्य लोग मौके का फायदा उठाकर भाग निकले। घायल हुए व्यक्ति को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसरांय लाया गया। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। 
बड़ा सवाल है कि मृतक का अपराधिक इतिहास शून्य है ।

पूरे मामले को पुलिस अधिकारी और टीम ने थाना प्रभारी को लहूलुहान देख उसकी रची कहानी पर मान लिया था कि ऎसी घटना को अंजाम केवल संगीन अपराधी ही दे सकता है ? जबकि पुष्पेन्द्र केवल पुलिस कि पकड़ से भागने में लगा था कि अगर हाथ आ गया तो चरम मरम्मत से नहीं बचूंगा , आवेश में आए थानेदार को भी जुनून रहा होगा कि अगर नहीं पकड़ा तो उसकी थानेदारी की भद्द कुट जाएगी ? बस इसकी परिणीति सामने है ।

पूरे दिन से मामले में लीपापोती कर रही पुलिस आखिर में कमजोर साबित हुई । इस घटना के बाद रविवार सुबह से ही गुरसरांय थाना क्षेत्र में पुलिस बल का डेरा बना रहा।  सर्विलांस टीम, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण समेत करीब दर्जन भर थाने की पुलिस बल पूरे दिन गुरसांराय में डेरा जमाए रही वहीं दूसरी तरफ पुलिस की कथित मुठभेड़ में मारे गए युवक के बारे में जहां आम जनमानस तक की सारी जानकारी रही तो वहीं दूसरी तरफ पुलिस अपने कागजों में युवक को अज्ञात भी दर्शाती रही यहां तक कि मुठभेड़ के दौरान गोली लगने के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसराय लाने के दौरान भी युवक को अज्ञात ही दर्शाया गया है । डॉक्टर द्वारा युवक की मौत की पुष्टि के बाद पुलिस द्वारा बिना पंचनामा भरे तड़के सुबह ही युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए मऊरानीपुर रवाना कर दिया था लेकिन पंचनामा ना होने के कारण पोस्टमार्टम हाउस से शव को वापस भेजा गया। जिसके बाद शव को वापस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरसांराय लाया गया इसके बाद पुलिस द्वारा एक बार फिर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा,  पोस्टमार्टम के लिए भेज देने के करीब 1 घंटे बाद पुलिस ने पंचनामा भरने के लिए आसपास के लोगों को पकड़ कर पंचनामें पर दस्तखत करने के लिए कहा , इस दौरान एक व्यक्ति जो थाने में अपनी चोरी होने की शिकायत दर्ज कराने आया था, उससे भी पंचनामा पर दस्तखत करा लिए गए। जबकि उसे इस घटना के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी और ना ही उसने युवक के शव को देखा

करीब 3:00 बजे तक पुलिस द्वारा मुठभेड़ में मारे गए युवक के परिजनों को इसकी सूचना नहीं दी गई थी। जबकि अन्य लोगों के द्वारा सुबह ही मृतक युवक के परिजनों को इसकी जानकारी हो गई थी। जानकारी होते ही मृतक के परिजन और रिश्तेदार अपने बेटे के शव को देखने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और मऊरानीपुर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे लेकिन पुलिस ने मृतक पुष्पेंद्र के शव को किसी को नहीं देखने दिया। और तो और इस बड़ी घटना के पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी मीडियाकर्मियों के सवालों से बचते नजर आए । इस दौरान किसी भी अधिकारी ने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया, और ना ही इस घटना से संबंधित कोई जानकारी अधिकृत रूप से और अनाधिकृत रूप से साझा की। इन सब हालातों ने भी पुलिस को संदेह के कटघरे में खड़ा करने में कोई कमी नहीं रखी ।

*मृतक के पिता बोले- पुलिस झूठी मेरे बेटे की हत्या की पुलिस ने ?*

एरच थाना क्षेत्र के गांव करगुंआ निवासी पुष्पेंद्र यादव के पिता ने इस बारे में मीडिया कर्मियों से बात करते हुए कहा कि उसके बेटे का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था, और ना ही आज तक उसका किसी से झगड़ा हुआ है। ऐसे में पुलिस द्वारा *मुठभेड़ के दौरान उसके बेटे को मार देने की कहानी सरासर झूठी है।* पुलिस खुद को बचाने के लिए यह कहानी रच रही है।

तीन महीने पहले शादी हुई थी 

पुलिस अपराधिक मामलों की विवेचना में 90 दिनों का अवसर की अधिकारी है लेकिन जब खुद लहूलुहान हो जाए तो निरपराधी को जिसकी शादी को हुए अभी 90 दिन व्यतीत भी नहीं हुए थे को 09घंटे में ही मौत कि नींद सुला देने के लिए फर्जी मुठभेड़ भी रच सकती है ?कथित पुलिस मुठभेड़ में मारे गए युवक पुष्पेंद्र की शादी को करीब 3 माह ही होने को हैं । उसका विवाह जालौन जनपद के पिपराया की रहने वाली 24 वर्षीय शिवांगी से हुआ था। घटना की सूचना मिलने के बाद से ही पुष्पेंद्र की पत्नी शिवांगी बदहवास स्थिति में है। पुष्पेंद्र की मां का भी रो-रो कर बुरा हाल है।
*पुष्पेंद्र की मौत से पूरे क्षेत्र में हाहाकार*
पुलिस की गोली लगने से हुई पुष्पेंद्र की मौत से एक तरफ जहां पूरे गांव में आक्रोशित शोक की लहर है तो वहीं आसपास के क्षेत्र के गांव और पुष्पेंद्र से जुड़े अन्य लोग भी आत्मीय दुखी हैं। सभी लोग पुलिस को जल्लाद बताकर पूरे महकमे की कार्यप्रणाली को दागदार बता रहे हैं। और इसे फर्जी मुठभेड़ कह रहे हैं।

*सपा नेता बोले, पुलिस ने की है हत्या, दर्ज हो मुकद्दमा*

इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव ने कहा है कि यह पूरी घटना पुलिस की एक साजिश है। पुलिस खुद को बचाने के लिए यह कहानी बुन रही है। पुलिस द्वारा लगातार निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस कि यह मुठभेड़ फर्जी है, और पुलिस ने जानबूझकर युवक की हत्या की है। जिसको लेकर पुलिस पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए और इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।

*देश की सेवादारी में है परिवार, पुष्पेन्द्र हुआ पुलिस मुठभेड़ का शिकार*

 पुलिस की कथित मुठभेड़ में मारे गए 28 वर्षीय पुष्पेंद्र यादव के पिताजी सीआईएसफ में कार्यरत थे। करीब 10 साल पहले उनके पिताजी की कुएं में गिरने से आंखों की रोशनी चली गई थी। जिसके बाद उनकी नौकरी पुष्पेंद्र के बड़े भाई रविन्द्र को मिल गई है। रविन्द्र अभी दिल्ली मेट्रो में सीआईएसएफ की नौकरी कर रहा है। जबकि पुष्पेंद्र का एक चचेरा भाई पुलिस विभाग में ही दरोगा है। ऐसे में हर कोई यही कह रहा है कि जिसका पूरा परिवार देश की सेवा में लगा हुआ है उसे प्रदेश के सिपाहियों ने एक ऐसा नाम दिया है।

*एसएसपी का मीडिया को दिया बयान गले से नीचे नही उतरता*

: प्रभारी निरीक्षक मोठ छुट्टी पर गए थे और अकेले ही अपनी प्राइवेट गाड़ी से खुद चलाके आरहे उनका कहना है कि एक स्थानीय व्यक्ति ने उन्हें फोन करके कहा कि हम आपसे मिलना चाहते हैं तो उहोंने कहा कि में घर से लौट रहा हूँ आप यंहा मोड़ पर आजाओ प्रभारी निरीक्षक सादा कपड़ो में थे घर से लौट रहे थे अकेले थे अपनी कार से उन्होंने बताया कि जैसे ही वो लोग पहुंचे प्रभारी निरीक्षक ने गाड़ी का शीशा नीचे किया उन्होंने फायर कर दिया गोली उनकी ठोड़ी को क्रॉस करते निकल गया है और गाल पर भी चोट के निशान है उसके बाद वो लोग भागे तो उनकी मोटर साइकिल छूट गई प्रभारी निरीक्षक ने पीछा किया कुछ दूर तक हमारी टीम उनका पीछा कर रही है एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्यवाही की जारही है और एसएसपी ने बताया कि जो प्राइवेट वाहन था प्रभारी निरीक्षक का शायद लेके चले गए है।

( एक तरफ एसएसपी महोदय बयान देते है कि जब वो लोग फायर करते है तो प्रभारी निरीक्षक की ठोड़ी को क्रॉस करते हुए निकल गया और गाल पर भी चोट आई है जब फायर क्रॉस कर गया ठोड़ी से तो गाल पर क्या बैक होके चोट मारा फायर ने ,एसएसपी कहते है कि जबवोलोग भागे तो प्रभारी निरीक्षक ने पीछा किया और उनकी मोटर साइकिल छूट गई जो लोग डरके मोटर साइकिल नही ले जापाये वो प्रभारी निरीक्षक की गाड़ी कैसे लूट ले गए ऐसे कई अन सुलझे सवाल फर्जी मुठभेड़ की तरफ इशारा करते है।)