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उत्तर प्रदेश खादी महोत्सव में ‘‘गीत-गजल की महफिल’’महोत्सव में रविवार की शाम का अंदाज ही कुछ अलग रहा पढ़े पूरी खबर :::--
October 6, 2019 • Sun India Tv News चैनल
 
 
लखनऊ, दिनांक-06.10.2019।
 
उ0प्र0 खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा महात्मा गांधी जी की 150वीं जयन्ती के अवसर पर इन्दिरा गांधी प्रतिश्ठान, गोमती नगर, लखनऊ में 12 दिवसीय खादी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा हैं, जो दिनांक 02.10.2019 से षुरू है, और दिनांक-13.10.2019 को समाप्त होगा। खादी महोत्सव का आज पांचवा दिन है।
 
”आओ बनायें खादी, आओ अपनायें खादी“  विशय पर आयोजित खादी महोत्सव में 100 से अधिक स्टाॅल लगाये गये हैं। रविवार व दषहरे की छुट्टियांे के कारण स्टालों पर आज भारी संख्या में लोग अपनी पसन्द के सामानों की खरीदारी करते देखे गये। प्रदर्षनी में क्षेत्रीय गाॅंधी आश्रम लखनऊ एवं बाराबंकी द्वारा निर्मित विभिन्न प्रकार के सूती, ऊनी, पाॅली-खादी, रेषम के सूट, चादर, रजाई-गद्दे आदि वस्तुएं उपलब्ध हैं। प्रदर्षनी में आए आगंतुकांे द्वारा भारी मात्रा में खरीदारी की जा रही है। इसके अतिरिक्त प्रदर्षनी में विभिन्न प्रकार के रत्न, रुद्राक्ष, यंत्र, मोती की माला, मिट्टी के बर्तन तथा हर्बल उत्पाद आदि भी उपलब्ध हैं।
 
प्रदर्षनी में राजस्थान, गुजरात, वाराणसी, उत्तराखण्ड एवं बिहार राज्यों से भी उद्यमी पधारे हैं जो अपने उत्कृश्ट उत्पादों का प्रदर्षन कर रहे हैं। जैसे-राजस्थान के बीकानेरी पापड़ एवं नमकीन, उत्तरांचल के कम्बल एवं जैकेट, वाराणसी के रेषम एवं सिल्क साड़ी तथा गुजरात के हस्तषिल्प कला से निर्मित उत्पाद भी प्रदर्षनी के मुख्य आकर्शण हैं जिनकी काफी बिक्री हो रही है। खबर लिखे जाने तक महोत्सव में अब तक लगभग रु0 47.50 लाख रुपये तक की बिक्री हो चुकी है।
 
महोत्सव में रविवार की षाम का अंदाज कुछ अलग ही रहा, मौका था जानी-मानी प्रसिद्ध गायिका सुश्री मालविका हरिओम द्वारा प्रस्तुत की गयी गज़ल व गीत, जिसकी षुरूआत उन्होंने गांधी जी को समर्पित गीत- वैश्णों जन तो तेने कहिये से की, इसके बाद गजल-मेरे जैसे बन जाओगे, बाद मेरे भी फैज बनाए रखना एवं गाड़ी हौले चलाओ गाड़ीवान गीत की मनमोहक प्र्र्रस्तुतियां दी, जिससे माहौल खुषनुमा हो गया और लोगों ने इसका आनन्द उठाया। उनके साथी कलाकार के रूप में गिटार पर राकेष आर्या, तबले पर षेख इब्राहिम एवं की-बोर्ड पर मयंक सिंह भी षामिल थें। इसके बाद देर रात तक फरमाइषों का दौर चलता रहा और लोग उसका आनन्द उठाते रहंे तथा तालियों से उनकी हौसला अफजाई करते रहें।